कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ

दोहा १७९ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ। मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ॥ १७९ ॥

अर्थ

फिर उसने जाकर [एक बार] खिलवाड़ ही में कैलास पर्वत को उठा लिया और मानो अपनी भुजाओं का बल तौलकर, बहुत सुख पाकर वह वहाँ से चला आया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का दोहा १७९ है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार