जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे
जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे
चौपाई ४, दोहा १७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे। सुखी सकल रजनीचर कीन्हे॥ एक बार कुबेर पर धावा। पुष्पक जान जीति लै आवा॥ ४ ॥
अर्थ
योग्यता के अनुसार घरों को बाँटकर रावण ने सब राक्षसों को सुखी किया। एक बार वह कुबेर पर चढ़ दौड़ा और उससे पुष्पक विमान जीतकर ले आया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार