कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत

दोहा १८८ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत। पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत॥ १८८ ॥

अर्थ

उनकी कौसल्या आदि प्रिय रानियाँ सभी पवित्र आचरणवाली थीं। वे विनीत और पति के अनुकूल चलनेवाली थीं और श्रीहरि के चरणकमलों में उनका दृढ़ प्रेम था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का दोहा १८८ है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ