अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ
अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ
चौपाई ४, दोहा १८८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ॥ धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी॥ ४ ॥
अर्थ
अवधपुरी में रघुकुलमणि राजा दशरथ नाम के राजा हुए, जिनका नाम वेद में विख्यात है। वे धर्म-धुरन्धर, गुणों के भण्डार और ज्ञानी थे। उनके हृदय में भगवान् की भक्ति थी, और उनकी बुद्धि भी श्रीराम में लगी रहती थी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ