जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा
जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा
चौपाई १, दोहा १८७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा॥ अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा॥ १ ॥
अर्थ
हे मुनि, सिद्ध और देवताओं के स्वामियो! डरो मत। तुम्हारे लिये मैं मनुष्य का रूप धारण करूँगा और उदार सूर्यवंश में अंशों सहित मनुष्य का अवतार लूँगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “भगवान का वरदान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भगवान द्वारा रघुकुल में अवतार लेने के वरदान और देवताओं को मिली शांति का वर्णन है।
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भगवान का वरदान