कासीं मरत जंतु अवलोकी

चौपाई १, दोहा ११९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी॥ सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी॥ १ ॥

अर्थ

[हे पार्वती!] जिनके नाम के बल से काशी में मरते हुए प्राणी को देखकर मैं उसे [राममन्त्र देकर] शोकरहित कर देता हूँ, वही मेरे प्रभु रघुश्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी जड़-चेतन के स्वामी और सब के हृदय के भीतर की जाननेवाले हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद