जेहि इमि गावहिं बेद बुध जाहि
जेहि इमि गावहिं बेद बुध जाहि
दोहा ११८ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जेहि इमि गावहिं बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान। सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान॥ ११८ ॥
अर्थ
जिसका वेद और पण्डित इस प्रकार वर्णन करते हैं और मुनि जिसका ध्यान धरते हैं, वही दशरथनन्दन, भक्तों के हितकारी, अयोध्या के स्वामी भगवान् श्रीरामचन्द्रजी हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का दोहा ११८ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद