करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा
करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा
चौपाई २, दोहा २०१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा॥ बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई॥ २ ॥
अर्थ
पूजा करके नैवेद्य चढ़ाया और स्वयं वहाँ गयी, जहाँ पाक बनाया गया था। फिर माता वहाँ लौटकर आईं और वहाँ आकर पुत्र को भोजन करते देखा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २०१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला