करि प्रनाम रामहि त्रिपुरारी

चौपाई ३, दोहा ११२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

करि प्रनाम रामहि त्रिपुरारी। हरषि सुधा सम गिरा उचारी॥ धन्य धन्य गिरिराजकुमारी। तुम्ह समान नहिं कोउ उपकारी॥ ३ ॥

अर्थ

त्रिपुरासुर का वध करनेवाले शिवजी श्रीरामचन्द्रजी को प्रणाम करके आनन्द में भरकर अमृत के समान वाणी बोले--हे गिरिराजकुमारी पार्वती! तुम धन्य हो! धन्य हो! तुम्हारे समान कोई उपकारी नहीं है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद