बंदउँ बालरूप सोइ रामू
बंदउँ बालरूप सोइ रामू
चौपाई २, दोहा ११२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बंदउँ बालरूप सोइ रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू॥ मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥ २ ॥
अर्थ
मैं उन्हीं श्रीरामचन्द्रजी के बालरूप की वन्दना करता हूँ, जिनका नाम जपने से सब सिद्धियाँ सहज ही प्राप्त हो जाती हैं। मंगल के धाम, अमंगल के हरनेवाले और श्रीदशरथजी के आँगन में खेलनेवाले वे (बालरूप) श्रीरामचन्द्रजी मुझ पर कृपा करें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद