करि मुनि चरन सरोज प्रनामा

चौपाई ३, दोहा २३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

करि मुनि चरन सरोज प्रनामा। आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा॥ बिगत निसा रघुनायक जागे। बंधु बिलोकि कहन अस लागे॥ ३ ॥

अर्थ

मुनि के चरणकमलों में प्रणाम करके, आज्ञा पाकर उन्होंने विश्राम किया; रात बीतने पर श्रीरघुनाथजी जागे और भाई को देखकर ऐसा कहने लगे—

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद