बैदेही मुख पटतर दीन्हे

चौपाई २, दोहा २३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोषु बड़ अनुचित कीन्हे॥ सिय मुखछबि बिधु ब्याज बखानी। गुर पहिं चले निसा बड़ि जानी॥ २ ॥

अर्थ

अतः जानकीजी के मुख की उपमा देने में बड़ा अनुचित कर्म करने का दोष लगेगा। इस प्रकार चन्द्रमा के बहाने सीताजी के मुख की छवि का वर्णन करके, बड़ी रात हो गयी जानकर, वे गुरुजी के पास चले।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।

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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद