उयउ अरुन अवलोकहु ताता
उयउ अरुन अवलोकहु ताता
चौपाई ४, दोहा २३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
उयउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता॥ बोले लखनु जोरि जुग पानी प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी॥ ४ ॥
अर्थ
है तात! देखो, कमल, चक्रवाक और समस्त संसार को सुख देनेवाला अरुणोदय हुआ है। लक्ष्मणजी दोनों हाथ जोड़कर प्रभु के प्रभाव को सूचित करनेवाली कोमल वाणी बोले—
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सीताजी का पार्वती पूजन, वरदान-प्राप्ति और राम-लक्ष्मण के मधुर संवाद का वर्णन है।
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सीता का पार्वती पूजन, राम-लक्ष्मण संवाद