करेहु सदा संकर पद पूजा
करेहु सदा संकर पद पूजा
चौपाई २, दोहा १०२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा॥ बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी॥ २ ॥
अर्थ
हे पार्वती! तू सदा शिवजी के चरणों की पूजा करना, नारियों का यही धर्म है। उनके लिये पति ही देवता है और कोई देवता नहीं है। इस प्रकार की बातें कहते-कहते उनकी आँखों में आँसू भर आये और उन्होंने कन्या को छाती से चिपटा लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह