बहु बिधि संभु सासु समुझाई

चौपाई १, दोहा १०२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बहु बिधि संभु सासु समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई॥ जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही॥ १ ॥

अर्थ

शिवजी ने बहुत तरह से अपनी सास को समझाया। तब वे शिवजी के चरणों में सिर नवाकर घर गयीं। फिर माता ने उमा को बुला लिया और गोद में बैठाकर यह सुन्दर सीख दी--।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह