कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा

चौपाई ४, दोहा १२४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा। का अपराध रमापति कीन्हा॥ यह प्रसंग मोहि कहहु पुरारी। मुनि मन मोह आचरज भारी॥ ४ ॥

अर्थ

मुनि ने भगवान् को शाप किस कारण से दिया? लक्ष्मीपति भगवान् ने उनका क्या अपराध किया था? हे पुरारि (शिवजी)! यह कथा मुझसे कहिये। मुनि नारद के मन में मोह होना बड़े आश्चर्य की बात है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीरामावतार के हेतु” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीरामावतार के कारणों और रावण-कुम्भकर्ण के जन्म के हेतु का वर्णन है।

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श्रीरामावतार के हेतु