करम लिखा जौं बाउर नाहू
करम लिखा जौं बाउर नाहू
चौपाई ४, दोहा ९७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
करम लिखा जौं बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू॥ तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका॥ ४ ॥
अर्थ
जो मेरे भाग्य में बावला ही पति लिखा है तो किसी को क्यों दोष लगाया जाय? हे माता! क्या विधाता के अंक तुमसे मिट सकते हैं ? वृथा कलंक का टीका मत लो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी की विचित्र बारात” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिवजी की विचित्र बारात और हिमवान के घर विवाह की मंगल तैयारी का वर्णन है।
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शिवजी की विचित्र बारात