जबहिं संभु कैलासहिं आए

चौपाई २, दोहा १०३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए॥ जगत मातु पितु संभु भवानी। तेहिं सिंगारु न कहउँ बखानी॥ २ ॥

अर्थ

जब शिवजी कैलास पर्वत पर पहुँचे, तब सब देवता अपने-अपने लोकों को चले गये। [तुलसीदासजी कहते हैं कि] पार्वतीजी और शिवजी जगत् के माता-पिता हैं, इसीलिए मैं उनके सिंगार का वर्णन नहीं करता।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह