कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति

दोहा १६० · बालकाण्ड

दोहा पाठ

कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत। नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेत॥ १६० ॥

अर्थ

वह कपट में डुबोकर बड़ी युक्ति के साथ कोमल वाणी बोला--अब हमारा नाम भिखारी है, क्योंकि हम निर्धन और अनिकेत (घर-द्वारहीन) हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का दोहा १६० है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
प्रतापभानु की कथा