कह नृप जे बिग्यान निधाना

चौपाई १, दोहा १६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना॥ सदा रहहिं अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ॥ १ ॥

अर्थ

राजाने कहा--जो आपके सदृश विज्ञान के निधान और सर्वथा अभिमानरहित होते हैं, वे अपने स्वरूप को सदा छिपाये रहते हैं। क्योंकि कुवेष बनाकर रहने में ही सब तरह का कल्याण है (प्रकट संतवेष में मान होने की सम्भावना है और मान से पतन की)।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा