भुज बिसाल भूषन जुत भूरी
भुज बिसाल भूषन जुत भूरी
चौपाई ३, दोहा १९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी॥ उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा॥ ३ ॥
अर्थ
बहुत-से आभूषणों से सुशोभित विशाल भुजाएँ हैं। हृदय पर हरि-नख की बहुत ही निराली छटा है। छाती पर मनिहार-पदिक की शोभा है; ब्राह्मण-चरण देखते ही मन लुभा जाता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला