काम कोह मद मोह नसावन
काम कोह मद मोह नसावन
चौपाई ३, दोहा ४३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन॥ सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें॥ ३ ॥
अर्थ
यह जल काम, क्रोध, मद और मोह का नाश करनेवाला और निर्मल विवेक तथा वैराग्य को बढ़ानेवाला है। इसमें आदरपूर्वक स्नान करने से और इसे पीने से हृदय में रहनेवाले सब पाप-ताप मिट जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य