काम कोह कलिमल करिगन के
काम कोह कलिमल करिगन के
चौपाई ४, दोहा ३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
काम कोह कलिमल करिगन के। केहरि सावक जन मन बन के॥ अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के॥ ४ ॥
अर्थ
भक्तों के मनरूपी वन में बसनेवाले काम, क्रोध और कलियुग के पापरूपी हाथियों के मारने के लिए सिंह के बच्चे हैं। शिवजी के पूज्य और प्रियतम अतिथि हैं और दरिद्रतारूपी दावानल के बुझाने के लिए कामना पूर्ण करनेवाले मेघ हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा