समन पाप संताप सोक के
समन पाप संताप सोक के
चौपाई ३, दोहा ३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
समन पाप संताप सोक के। प्रिय पालक परलोक लोक के॥ सचिव सुभट भूपति बिचार के। कुंभज लोभ उदधि अपार के॥ ३ ॥
अर्थ
पाप, संताप और शोक का नाश करनेवाले तथा इस लोक और परलोक के प्रिय पालन करनेवाले हैं। विचार (ज्ञान) रूपी राजा के शूरवीर मंत्री और लोभरूपी अपार समुद्र के सोखने के लिए अगस्त्य मुनि हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम के गुण, चरित्र और रामकथा की पवित्रता एवं मुक्तिदायक महिमा का वर्णन है।
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श्रीरामगुण और श्रीरामचरित की महिमा