काम चरित नारद सब भाषे
काम चरित नारद सब भाषे
चौपाई ४, दोहा १२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे॥ अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया॥ ४ ॥
अर्थ
यद्यपि श्रीशिवजी ने उन्हें पहले से ही बरज रखा था, तो भी नारदजी ने कामदेव का सारा चरित्र भगवान् को कह सुनाया। श्रीरघुनाथजी की माया बड़ी ही प्रबल है। जगत् में ऐसा कौन जन्मा है जिसे वह मोहित न कर दे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।
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नारद का अभिमान और माया