हरषि मिले उठि रमानिकेता

चौपाई ३, दोहा १२८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता॥ बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया॥ ३ ॥

अर्थ

रमानिवास भगवान् उठकर बड़े आनन्द से उनसे मिले और ऋषि के साथ आसन पर बैठ गये। चराचर के स्वामी भगवान् हँसकर बोले--हे मुनि! आज आपने बहुत दिनों बाद कृपा की।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का अभिमान और माया” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १२८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का कामजय के बाद अभिमान और भगवान की माया का प्रभाव का वर्णन है।

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नारद का अभिमान और माया