गुर पितु मातु महेस भवानी

चौपाई २, दोहा १५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी॥ सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसी के॥ २ ॥

अर्थ

श्रीमहेश और पार्वती को मैं प्रणाम करता हूँ, जो मेरे गुरु, पिता और माता हैं, जो दीनबन्धु और नित्य दान करनेवाले हैं, जो सीतापति श्रीरामचन्द्रजी के सेवक, स्वामी और सखा हैं तथा मुझ तुलसीदास का सब प्रकार से कपटरहित (सच्चा) हित करनेवाले हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, शिव-पार्वती सहित समस्त पूज्य शक्तियों की वन्दना का वर्णन है।

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वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना