कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ

चौपाई १, दोहा ७१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ। आगिल चरित सुनहु जस भयऊ॥ पतिहि एकांत पाइ कह मैना। नाथ न मैं समुझे मुनि बैना॥ १ ॥

अर्थ

यों कहकर नारद मुनि ब्रह्मलोक को चले गये। अब आगे जो चरित्र हुआ उसे सुनो। पति को एकान्त में पाकर मैना ने कहा-हे नाथ! मैंने मुनि के वचनों का अर्थ नहीं समझा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

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पार्वती का जन्म और तपस्या