अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि

दोहा ७० · बालकाण्ड

दोहा पाठ

अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस। होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस॥ ७० ॥

अर्थ

ऐसा कहकर नारदजी ने हरि का स्मरण करके गिरिजा को आशीर्वाद दिया। [और कहा कि--] अब यह कल्याण ही होगा, हे गिरीश! तुम सन्देह का त्याग कर दो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पार्वती का जन्म और तपस्या” प्रकरण का दोहा ७० है। इस प्रकरण में सती के पार्वती रूप में जन्म और शिव-प्राप्ति हेतु कठोर तपस्या का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
पार्वती का जन्म और तपस्या