एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं

चौपाई १, दोहा ३१२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं॥ जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए॥ १ ॥

अर्थ

इस प्रकार सब मनोरथ कर रही हैं और हृदय को उमँग-उमँगकर आनन्द से भर रही हैं। सीताजी के स्वयंवर में जो राजा आये थे, उन्होंने भी चारों भाइयों को देखकर सुख पाया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत