कहत चले पहिरें पट नाना

चौपाई १, दोहा २९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना॥ समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होन बधाए॥ १ ॥

अर्थ

यों कहते हुए वे अनेक प्रकार के सुन्दर वस्त्र पहन-पहनकर चले। आनन्दित होकर नगाड़ेवालों ने बड़े जोर से नगाड़ों पर चोट लगायी। सब लोगों ने जब यह समाचार पाया, तब घर-घर बधावे होने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान