भुवन चारि दस भरा उछाहू
भुवन चारि दस भरा उछाहू
चौपाई २, दोहा २९६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू॥ सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे॥ २ ॥
अर्थ
चौदहों लोकों में उत्साह भर गया कि जानकीजी और श्रीरघुनाथजी का विवाह होगा। यह शुभ समाचार पाकर लोग प्रेममग्न हो गये और रास्ते, घर तथा गलियाँ सजाने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २९६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान