कहहिं ते बेद असंमत बानी
कहहिं ते बेद असंमत बानी
चौपाई २, दोहा ११५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी॥ मुकुर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना॥ २ ॥
अर्थ
और जिन्हें अपनी लाभ-हानि नहीं सूझती, वे ही ऐसी वेदविरुद्ध बातें कहा करते हैं। जिनका हृदयरूपी दर्पण मैला है और जो नेत्रों से हीन हैं, वे बेचारे श्रीरामचन्द्रजी का रूप कैसे देखें!।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद