अग्य अकोबिद अंध अभागी

चौपाई १, दोहा ११५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकुर मन लागी॥ लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी॥ १ ॥

अर्थ

जो अज्ञानी, अकबुद्धि, अंधे और अभागे हैं और जिनके मनरूपी दर्पण पर विषयरूपी काई जमी हुई है; जो लंपट, कपटी, विशेषरूप से कुटिल हैं और जिन्होंने स्वप्न में भी संतसभा नहीं देखी;

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद