तेहि तें कहहिं संत श्रुति टेरें

चौपाई २, दोहा १६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहि तें कहहिं संत श्रुति टेरें। परम अकिंचन प्रिय हरि केरें॥ तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा। होत बिरंचि सिवहि संदेहा॥ २ ॥

अर्थ

इसीसे तो संत और वेद पुकारकर कहते हैं कि परम अकिंचन (सर्वथा अहंकार, ममता और मानरहित) ही भगवान् को प्रिय होते हैं। आप-सरीखे निर्धन, भिखारी और गृहहीनों को देखकर ब्रह्मा और शिवजी को भी सन्देह हो जाता है [कि वे वास्तविक संत हैं या भिखारी ]।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा