कबित बिबेक एक नहिं मोरें
कबित बिबेक एक नहिं मोरें
चौपाई ६, दोहा ९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरें॥ ६ ॥
अर्थ
इनमें से काव्यसम्बन्धी एक भी बात का ज्ञान मुझमें नहीं है, यह मैं कोरे कागज पर लिखकर [शपथपूर्वक] सत्य-सत्य कहता हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।
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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता