आखर अरथ अलंकृति नाना

चौपाई ५, दोहा ९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

आखर अरथ अलंकृति नाना। छंद प्रबंध अनेक बिधाना॥ भाव भेद रस भेद अपारा। कबित दोष गुन बिबिध प्रकारा॥ ५ ॥

अर्थ

नाना प्रकार के अक्षर, अर्थ और अलंकार, अनेक प्रकार की छन्द-रचना, भावों और रसों के अपार भेद और कविताके भाँति-भाँति के गुण-दोष होते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।

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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता