भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व
भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व
दोहा ९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक। सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिबेक॥ ९ ॥
अर्थ
मेरी रचना सब गुणों से रहित है; इसमें बस, जगत् प्रसिद्ध एक गुण है। उसे विचारकर अच्छी बुद्धिवाले पुरुष, जिनके निर्मल विवेक हैं, इसको सुनेंगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता” प्रकरण का दोहा ९ है। इस प्रकरण में तुलसीदासजी की दीनता, प्रभु-कृपा पर निर्भरता और रामभक्तिमयी कविता की पवित्र महिमा का वर्णन है।
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तुलसीदास की दीनता और भक्तिकविता