का बरषा सब कृषी सुखानें

चौपाई २, दोहा २६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें॥ अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी॥ २ ॥

अर्थ

सारी खेती के सूख जाने पर वर्षा किस काम की? समय बीत जाने पर फिर पछताने से क्या लाभ? जी में ऐसा समझकर श्रीरामजी ने जानकीजी की ओर देखा और उनका विशेष प्रेम लखकर वे पुलकित हो गये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
धनुषभंग