देखी बिपुल बिकल बैदेही
देखी बिपुल बिकल बैदेही
चौपाई १, दोहा २६१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
देखी बिपुल बिकल बैदेही। निमिष बिहात कलप सम तेही॥ तृषित बारि बिनु जो तनु त्यागा। मुएँ करइ का सुधा तड़ागा॥ १ ॥
अर्थ
उन्होंने जानकीजी को बहुत ही विकल देखा। उनका एक-एक क्षण कल्प के समान बीत रहा था। यदि प्यासा आदमी पानी के बिना शरीर छोड़ दे, तो उसके मर जाने पर अमृत का तालाब भी क्या करेगा?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “धनुषभंग” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा शिवधनुष-भंग और सभा में हर्षोल्लास का वर्णन है।
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धनुषभंग