जो बसिष्ट अनुसासन दीन्ही
जो बसिष्ट अनुसासन दीन्ही
चौपाई १, दोहा ३५२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जो बसिष्ट अनुसासन दीन्ही। लोक बेद बिधि सादर कीन्ही॥ भूसुर भीर देखि सब रानी। सादर उठीं भाग्य बड़ जानी॥ १ ॥
अर्थ
वसिष्ठजी ने जो आज्ञा दी, उसे लोक और वेद की विधि के अनुसार राजा ने आदरपूर्वक किया। ब्राह्मणों की भीड़ देखकर अपना बड़ा भाग्य जानकर सब रानियाँ आदर के साथ उठीं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
बारात का अयोध्या लौटना