देहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन
देहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन
दोहा ३५१ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
देहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ। तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ॥ ३५१ ॥
अर्थ
सब जोहार करके आशिष देते हैं और गुणसमूहों की कथा गाते हैं। तब गुरु और ब्राह्मणों सहित राजा दशरथजी ने महल में गमन किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का दोहा ३५१ है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना