जिन्ह निज रूप मोहनी डारी

चौपाई ३, दोहा २२९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जिन्ह निज रूप मोहनी डारी। कीन्हे स्वबस नगर नर नारी॥ बरनत छबि जहँ तहँ सब लोगू। अवसि देखिअहिं देखन जोगू॥ ३ ॥

अर्थ

और जिन्होंने अपने रूप की मोहिनी डालकर नगर के स्त्री-पुरुषों को अपने वश में कर लिया है। जहाँ-तहाँ सब लोग उन्हीं की छबि का वर्णन कर रहे हैं। अवश्य [चलकर] उन्हें देखना चाहिये, वे देखने ही योग्य हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन