तासु बचन अति सियहि सोहाने
तासु बचन अति सियहि सोहाने
चौपाई ४, दोहा २२९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तासु बचन अति सियहि सोहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने॥ चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई॥ ४ ॥
अर्थ
उसके वचन सीताजी को अत्यन्त ही प्रिय लगे और दर्शन के लिये उनके नेत्र अकुला उठे। उसी प्यारी सखी को आगे करके सीताजी चलीं। पुरानी प्रीतिको कोई लख नहीं पाता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २२९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन