जिन्ह के यह आचरन भवानी

चौपाई २, दोहा १८४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी॥ अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी॥ २ ॥

अर्थ

[ श्रीशिवजी कहते हैं कि--] हे भवानी ! जिनके ऐसे आचरण हैं, उन सब प्राणियों को राक्षस ही समझना। इस प्रकार धर्म के प्रति [लोगों की] अत्यन्त ग्लानि देखकर पृथ्वी अत्यन्त भयभीत एवं व्याकुल हो गयी।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।

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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार