बाढ़े खल बहु चोर जुआरा
बाढ़े खल बहु चोर जुआरा
चौपाई १, दोहा १८४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा॥ मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा॥ १ ॥
अर्थ
पराये धन और परायी स्त्री पर मन चलानेवाले, दुष्ट, चोर और जुआरी बहुत बढ़ गये। लोग माता-पिता और देवताओं को नहीं मानते थे और साधुओं [की सेवा करना तो दूर रहा, उलटे उनसे] सेवा करवाते थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार