जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी

चौपाई ३, दोहा ११३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी॥ जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना॥ ३ ॥

अर्थ

जिन्होंने भगवान् की भक्ति को अपने हृदय में स्थान नहीं दिया, वे प्राणी जीते हुए ही मुर्दे के समान हैं। जो जीभ श्रीरामचन्द्रजी के गुणों का गान नहीं करती, वह मेढक की जीभ के समान है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद