कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती
कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती
चौपाई ४, दोहा ११३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती॥ गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला॥ ४ ॥
अर्थ
वह हृदय वज्र के समान कड़ा और निष्ठुर है, जो भगवान् के चरित्र सुनकर हर्षित नहीं होता। हे पार्वती! श्रीरामचन्द्रजी की लीला सुनो, यह देवताओं का कल्याण करनेवाली और दैत्यों को विशेषरूप से मोहित करनेवाली है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ११३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद