फिरि सब नगर दसानन देखा
फिरि सब नगर दसानन देखा
चौपाई ३, दोहा १७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा॥ सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी॥ ३ ॥
अर्थ
तब रावण ने घूम-फिरकर सारा नगर देखा, उसकी [स्थानसम्बन्धी] चिन्ता मिट गयी और उसे बहुत ही सुख हुआ। उस पुरी को स्वाभाविक ही सुन्दर और [बाहरवालों के लिये] दुर्गम जानकर रावण ने वहाँ अपनी राजधानी कायम की।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण, कुंभकर्ण आदि के जन्म, तपस्या से प्राप्त ऐश्वर्य और तीनों लोकों पर अत्याचार का वर्णन है।
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रावण का जन्म, ऐश्वर्य और अत्याचार