जेहि बिधि होइहि परम हित नारद
जेहि बिधि होइहि परम हित नारद
दोहा १३२ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार। सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार॥ १३२ ॥
अर्थ
हे नारदजी! सुनो, जिस प्रकार आपका परम हित होगा, हम वही करेंगे, दूसरा कुछ नहीं। हमारा वचन असत्य नहीं होता।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का दोहा १३२ है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग